रमज़ानुल मुबारक के दूसरे अशरे की फजीलत,मदरसा अल -जामे अतुल रिज़विया बरकातुल उलूम

रमज़ानुल मुबारक के दूसरे अशरे की फजीलत,मदरसा अल -जामे अतुल रिज़विया बरकातुल उलूम

ब्यूरो रिपोर्ट तबरेज़ खान

बदायूँ:-सहसवान रमज़ानुल मुबारक के दूसरे अशरे  की फजीलत अल्लाह तआला की अपने बन्दों के लिए नेअमतों और इनआमात का शुमार मुमकिन नहीं। लेकिन अल्लाह तआला की इन नेअमतों में रमज़ानुल मुबारक को एक अलग हैसियत हासिल है। हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम को इस महीने का इंतजार रहता था। और आप इसका शौक से इस्तकबाल फरमाते। रमज़ानुल मुबारक का पहला अशरा यानी रहमत ख़त्म हुआ। और दूसरा अशरा मग़फिरत का आगाज़ हो चुका है। रमज़ानुल मुबारक अल्लाह तआला की रहमत और मग़फिरत का महीना है। वो लोग खुश किस्मत हैं कि जिन्होंने इस पाक महीने में रोजे़ और इबादत करके अल्लाह तआला को राज़ी किया।यह वो महीना है जिसमें अल्लाह तआला निफ्ल का सवाब फ़र्ज़ के बराबर और फ़र्ज़ का सवाब सत्तर गुना बढ़ा देता है। और दूसरा अशरा मग़फिरत का है। जो ज़िन्दगी के दूसरे मरहले के लिए कार आमद है। इसकी वजह से क़ब्र में राहत मिलेगी। अल्लाह तआला तमाम ही हज़रात को रोज़े रखने की तौफीक अता फरमाए आमीन।

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