गंगा नदी के घटते जल स्तर से महानदी के किनारे रहने वाले ग्रामीणों की नींद उड़ा दी

गंगा नदी के घटते जल स्तर से महानदी के किनारे रहने वाले ग्रामीणों की नींद उड़ा दी

ब्यूरो रिपोर्ट तबरेज़ खान 

बदायूं:-सहसवान बीते एक पखवाड़े से गंगा नदी के घटते जल स्तर में महावा नदी के किनारे रहने वाले ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है महाभा नदी के किनारे सहसवान तहसील क्षेत्र के 2 गांव की आबादी पूर्ण रूप से प्रभावित हो गई है आबादी के प्रभावित होने से पीड़ित परिजन महाबा नदी के पुल पर अस्थाई रूप से परिजनों के साथ वह न प्रारंभ कर दिया है वही प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित दोनों गांव कि अभी कोई सुध नहीं ली है जिससे पीड़ित परिवारों में आक्रोश की भावना पनप रही है lज्ञात रहे सहसवान तहसील क्षेत्र में बहने वाली गंगा नदी एवं महाबा नदी का जल स्तर बढ़ जाने से दोनों नदियों के किनारे के हर वर्ष एक दर्जन से ज्यादा गांव प्रभावित होते हैं मैदानी क्षेत्रों एवं पहाड़ों पर लगातार हुई मूसलाधार वर्षा के चलते गंगा नदी में आई बाढ़ बीते एक पखवाड़े से धीमी पड़ गई है गंगा नदी का जलस्तर निरंतर कम होता जा रहा है वही बड़ी तेजी से भूमि का कटान हो रहा है इधर गांव नगला वरण के पास महाबा नदी तथा गंगा नदी का मिलन होने से महाबा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है महाबा नदी के किनारे बसे गांव तेलिया नगला तौफी नगला की आबादी पूर्ण रूप से बाढ़ के पानी में समा गई है दोनों गांव के चारों ओर बाढ़ का पानी भर जाने से ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है वही प्रशासन द्वारा पीड़ित परिजनों को आवागमन के वास्ते प्रशासन द्वारा नाव की व्यवस्था ना होने से पीड़ित परिवारों में आक्रोश की भावना पनप रही है lमहाभा नदी के तेजी से बढ़े जल स्तर से नदी के किनारे दर्जनों बसे गांव की आबादी को भी अब खतरा उत्पन्न हो गया है महाबा नदी के बड़े जलस्तर को प्रशासनिक अधिकारी एवं राजस्व टीम ने भ्रमण करना भी मुनासिब नहीं समझा जिससे महाभा नदी के पानी से प्रभावित 2 गांव की आबादी के लोगों में प्रशासन के विरुद्ध आक्रोश की भावना पनपती जा रही है पीड़ित परिवारों ने नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि बीते 2 दिन से दोनों गांव का आवागमन प्रभावित है प्रशासन ने उनके निकासी के लिए कोई भी साधन एवं सहायता उपलब्ध नहीं कराई है पीड़ित परिजन स्वयं ही अपने बच्चों पशुओं तथा रोजमर्रा के घरेलू सामान के साथ महाभा नदी पुल खुले आसमान के नीचे शरण लिए हुए हैं उनके पास धूप एवं वर्षा से बचने के लिए कोई भी साधन उपलब्ध नहीं है जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है उप जिला अधिकारी प्रेमपाल सिंह तहसीलदार शर्म ना नंद से मोबाइल पर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो संपर्क नहीं हो सका l

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